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छठ महापर्व का दूसरा दिन आज, क्यों बनाई जाती गुड़ की खीर? जानिए खरना की पूजन विधि और महत्व

लोकआस्था के महापर्व छठ का शुभारंभ हो चुका है और आज यानी रविवार को दूसरा दिन है. छठ के दूसरे दिन खरना पूजा का विधान है. उसके बाद अगले दो दिन शाम और सुबह के समय पर सूर्य देवता को अर्घ्य दी जाती है

ऐसे में आज हम आपको बताएंगे खरना का महत्व, पूजन विधि और क्यों खरना का प्रसाद में बनाई जाती गुड़ का खीर.

*खरना का महत्व (Chhath Kharna importance)*

छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना पूजा का महत्व है. यह दिन अत्यंत विशेष माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है. यह उपवास आत्मसंयम, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का प्रतीक है. दरअसल, खरना के दौरान व्रती अपने मन, विचार और कर्म को शुद्ध करते हैं, ताकि आने वाले कठोर व्रत के लिए पूर्ण तैयार हो सकें.

*खरना का प्रसाद, जानिए क्यों बनाते हैं खीर और रोटी?*
खरना पूजा में गुड़ की खीर और रोटी (सोहारी) बनाने की परंपरा है. खीर का प्रसाद चावल, दूध और गुड़ से बनाया जाता है. साथ ही गेहूं के आटे की रोटी या पूरी भी बनाई जाती है. बता दें कि यह प्रसाद केवल मिट्टी, पीतल या कांसा के बर्तनों में बनाया जाता है, ताकि उसकी पवित्रता बनी रहे. मान्यता के अनुसार, खीर- मिठास और संतोष का प्रतीक है, जबकि सोहारी श्रम-साधना और पूजा का प्रतीक माना है.

इस प्रसाद को शाम के समय सबसे पहले सूर्यदेव और छठी मैया को अर्पित किया जाता है. इसके बाद व्रती इसे ग्रहण करते हैं.

खरना का प्रसाद का सेवन करने के बाद ही 36 घंटे का का कठोर निर्जला उपवास शुरू हो जाता है

*खरना की पूजा विधि (Chhath Kharna Puja Vidhi)*

• खरना के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें. साफ और शुद्ध वस्त्र धारण करें
• आत्मिक शुद्धि का संकल्प लें और सूर्य देव व छठी मैया का ध्यान करते हुए दिनभर निर्जला व्रत रखें
• शाम की पूजा से पहले पूजन स्थल की सफाई करें और प्रसाद बनाएं
• प्रसाद तैयार होने के बाद सूर्यदेव और छठी मैया की विधिवत पूजा करें
• फिर मंत्र जप करते हुए पहले सूर्य देव और फिर छठी मैया को प्रसाद अर्पित करें

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